ग्रामीण राजस्थान में ज्ञान का उजियाला बिखेरता ज्ञान विहार स्कूल
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इस लेख के निमित मैं आपसे मुखातिब होते हुए आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हू कि जुलाई २००७ में मैंने एक छोटे से मंच के माध्यम से चंद जिम्मेदार और जागरूक अभिभावकों से एक विनम्र वादा किया था कि आसमा में हैं जितने तारे, उतने हैं अरमान हमारे उदीयमान, दीप्तिमान एवं ऊर्जावान शिखार्थियो को नया आकाश मिलेगा. आपको नौनिहालों कि प्रज्ञा, मेधा एवं प्रतिभा को सवारने के लिए इस शिक्षण संस्था में वह सब उपलब्ध करवाने का प्रयास होगा जिसकी आकांक्षा संजोकर आपने इस ज्ञान यज्ञशाला में प्रवेश दिलाया हैं.
मैं इस स्तम्भ की निमित विद्यालय एवं परबतसर क्षेत्र की गरिमा को द्विगुरित करने वाले सफल शिल्पी शिक्षक साथियो को भी कोटि-कोटि बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने संस्था के १३५० ज्ञान पिपासु शिक्षार्थियों का ज्ञान की तपिश देकर कुंदन बना दिया. मैं धन्यवाद् देना चाहूँगा शिक्षा जगत की अमूल्य धरोहर अन्य शिक्षण संस्थाओ की समर्पित संचालक समितियों को जिन्होंने एक स्वच्छ व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कायम करके मुझे निरंतर कर्त्तव्य पथ पर बढ़ने रहने के लिए प्रेरित किया.
अंत में एक बार फिर विगत ४ सत्रों के गौरवमय एवं सुखद संचालक में आपके अभूतपूर्व सहयोग के लिए आपका ह्रदय के अंत स्थल से आभार प्रकट करता हू और भविष्य के लिए आपको यह विश्वास दिलाता हु कि आपका यह विद्यालय आने वाले कल की नयी- पीड़ी की नयी तस्वीर होगा, कहना चाहूँगा-
इस पथ का उद्देश्य नहीं हैं, विश्रांत भवन में टिक जाना. बल्कि पहुचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं है.
विद्यालय मारवाड़ क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर नागौर जिले के परबतसर तहसील के किनसरिया गाँव में स्थित हैं. प्रकृति की गोद में स्थित विद्यालय का भव्य केम्पस, हर आगन्तुक को बरबस ही आकर्षित करता हैं. संस्था का उद्देश्य सुदूर ग्रामीर क्षेत्रो के आम विद्यार्थियों को महानगरो जैसी शिक्षण व्यवस्था करवाकर उन्हें कामयाबी की मंजिल तक पहुचाना हैं. जिसका ताजा उदहारण हैं राजू चौधरी जैसे होनहार विद्यार्थी हैं, जिन्होंने तिलोनिया(अजमेर) जैसे ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ सम्पूर्ण राजस्थान में अपना लोहा मनवाया हैं.
इस लेख के निमित मैं आपसे मुखातिब होते हुए आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हू कि जुलाई २००७ में मैंने एक छोटे से मंच के माध्यम से चंद जिम्मेदार और जागरूक अभिभावकों से एक विनम्र वादा किया था कि आसमा में हैं जितने तारे, उतने हैं अरमान हमारे उदीयमान, दीप्तिमान एवं ऊर्जावान शिखार्थियो को नया आकाश मिलेगा. आपको नौनिहालों कि प्रज्ञा, मेधा एवं प्रतिभा को सवारने के लिए इस शिक्षण संस्था में वह सब उपलब्ध करवाने का प्रयास होगा जिसकी आकांक्षा संजोकर आपने इस ज्ञान यज्ञशाला में प्रवेश दिलाया हैं.
मैं इस स्तम्भ की निमित विद्यालय एवं परबतसर क्षेत्र की गरिमा को द्विगुरित करने वाले सफल शिल्पी शिक्षक साथियो को भी कोटि-कोटि बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने संस्था के १३५० ज्ञान पिपासु शिक्षार्थियों का ज्ञान की तपिश देकर कुंदन बना दिया. मैं धन्यवाद् देना चाहूँगा शिक्षा जगत की अमूल्य धरोहर अन्य शिक्षण संस्थाओ की समर्पित संचालक समितियों को जिन्होंने एक स्वच्छ व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कायम करके मुझे निरंतर कर्त्तव्य पथ पर बढ़ने रहने के लिए प्रेरित किया.
अंत में एक बार फिर विगत ४ सत्रों के गौरवमय एवं सुखद संचालक में आपके अभूतपूर्व सहयोग के लिए आपका ह्रदय के अंत स्थल से आभार प्रकट करता हू और भविष्य के लिए आपको यह विश्वास दिलाता हु कि आपका यह विद्यालय आने वाले कल की नयी- पीड़ी की नयी तस्वीर होगा, कहना चाहूँगा-
इस पथ का उद्देश्य नहीं हैं, विश्रांत भवन में टिक जाना. बल्कि पहुचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं है.
साक्षात्कार: गिरधारी लाल मुंदलिया, निदेशक , ज्ञान विहार शिक्षणप्रशिक्षण सीनियर सेकंडरी स्कूल, बिदियाद, परबतसर, नागौर